एनडीए उम्मीदवार हरिवंश लगातार दूसरी बार बने राज्यसभा उपसभापति, जानें BHU से संसद तक का सफर


एनडीए उम्मीदार हरिवंश नारायण सिंह लगातार दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुन लिए गए हैं। उन्होंने विपक्ष के साझा उम्मीदवार राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा को हराया। राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने इस बात की घोषणा की। उपसभापति पद के चुनाव ध्वनिमत से ही कर लिया गया।

इससे पहले भाजपा के राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उच्च सदन में उपसभापति के लिए हरिवंश के नाम का प्रस्ताव किया। सांसद थावरचंद गहलोत ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया। उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल इस साल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। इस वजह से उप सभापति पद के लिए चुनाव कराया गया। साल  2018 में हरिवंश का इस पद के लिए कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद से मुकाबला था, लेकिन तब हरिप्रसाद को जीत नहीं मिल सकी थी। इस बार हरिवंश सिंह के खिलाफ संयुक्त विपक्ष ने आरजेडी सांसद मनोज झा को मैदान में उतारा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं हरिवंशजी जो दूसरी बार इस सदन का उपसभापति चुने जाने पर बधाई देता हूं। सामाजिक कार्यों और पत्रकारिता के जरिए हरिवंशजी ने एक ईमानदार पहचान बनाई है। इसके लिए मेरे मन में उनक प्रति काफी सम्मान है। ये भाव और आत्मीयता हरिवंश की अपनी कमाई हुई पूंजी है। पीएम ने कहा कि सदन में निष्पक्ष रूप से आपकी भूमिका लोकतंत्र को मजबूत करती है।’

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘यह दूसरी बार है जब उन्हें सदन के उपाध्यक्ष के रूप में चुना गया है। मैं उन्हें बधाई देता हूं।’ हरिवंश सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। हरिवंश राजनीति में जयप्रकाश नारायण के आदर्शों से भी प्रेरित हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताब दियारा गांव में 30 जून 1956 को जन्में हरिवंश को जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

बैंक में भी की नौकरी: उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ। वह ‘टाइम्स समूह’ की साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में 1981 तक उप संपादक रहे। हरिवंश 1981-84 तक हैदराबाद और पटना में बैंक ऑफ इंडिया में भी नौकरी की।

उन्होंने 1984 में पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्टूबर तक आनंद बाजार पत्रिका (एबीपी) समूह से प्रकाशित ‘रविवार साप्ताहिक पत्रिका’ में सहायक संपादक रहे। हरिवंश ने साल 1990-91 के कुछ महीनों तक तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम किया।

ढाई दशक से अधिक समय तक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक रहे हरिवंश को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने राज्यसभा में भेजा। उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है। हरिवंश ने कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। इनमें ‘दिसुम मुक्तगाथा और सृजन के सपने,’ ‘जोहार झारखंड,’ ‘झारखंड अस्मिता के आयाम,’ ‘झारखंड सुशासन अभी भी संभावना है,’ ‘बिहार रास्ते की तलाश’ शामिल हैं।

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