शो के पैनल पर शिवसेना नेता ने उठाए सवाल, एंकर का जवाब- आपकी पार्टी भी आपको यहां बैठाने लायक नहीं मानती, बैठाना बंद कर दूं?

Shivsena leader raises questions on panel in TV Debate show regarding Kanagana Ranaut Case, Anchor asks him if he should not call him again: शो के पैनल पर शिवसेना नेता ने उठाए सवाल, एंकर का जवाब- आपकी पार्टी भी आपको यहां बैठाने लायक नहीं मानती, बैठाना बंद कर दूं?


सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच के दौरान बॉलीवुड पर ड्रग्स कल्चर को बढ़ावा देने का आरोप लगाने वाली कंगना रनौत के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने जांच बिठा दी है। उद्धव सरकार ने मुंबई पुलिस को आदेश दिया है कि वह कंगना के ड्रग्स लेने के आरोपों की जांच करे। इस पर राजनीतिक गलियारों में भी बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र में विपक्षी पार्टियों ने शिवसेना पर कंगना के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। इस बीच एक टीवी डिबेट में अजीब स्थिति तब पैदा हो गई, जब शिवसेना के प्रवक्ता ने इस मामले में बहस के लिए बुलाए गए पैनल पर ही सवाल उठा दिए। हालांकि, शो के एंकर ने उन्हें डपटते हुए सीधी तरह से पक्ष रखने के लिए कह दिया।

दरअसल, शिवसेना के नेता विक्रम सिंह यादव आजतक के शो दंगल में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उनके साथ पैनल में मुस्लिम स्कॉलर अतीक उर रहमान, भाजपा की ओर से गौरव भाटिया, जदयू की तरफ से अजय आलोक, लोक गायिका मालिनी अवस्थी और राजनीतिक विश्लेषक रवि श्रीवास्तव शामिल थे। विक्रम ने इस पैनल पर ही सवाल उठा दिए। इस पर एंकर रोहित सरदाना ने उन्हें जवाब दिया। सरदाना ने कहा कि आपकी पार्टी आपको भी इस लायक नहीं मानती कि हम आपको बिठाएं, फिर भी हम आपको सम्मानस्वरूप बुला लेते हैं। क्या मैं आपको बिठाना बंद कर दूं। फिर आप कहेंगे कि हमारी पार्टी का पक्ष नहीं आया।

एंकर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि आईना देखने में अगर शकल गंदी दिखे, तो आईने को गंदा नहीं कहना चाहिए, बल्कि मुंह धो लेना चाहिए। इस पर शिवसेना नेता ने कहा कि आप लोगों को राजनीति के लिए बुलाते हैं, इससे आपकी राजनीति चल रही है, यह माना जाए। मीडिया भी उनके साथ मिला हुआ है।

इस पर एंकर ने पलटवार करते हुए कहा कि जब कंगना के एक ट्वीट पर उनका घर तोड़ दिया जाता है, तो यह पूरी बहस ही राजनीतिक हो चुकी है। जब पूर्व मुख्यमंत्री कह रहा है कि सरकार दाऊद इब्राहिम का मकान नहीं तोड़ती, लेकिन कंगना का मकान तोड़ आती है, तो बहस तो राजनीतिक हो ही चुकी है।

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