वक्त की नब्ज: यह पत्रकारिता नहीं

The kind of coverage being done in the media about actress rhea chakraborty is not journalism - वक्त की नब्ज: यह पत्रकारिता नहीं


रिया चक्रवर्ती पिछले सप्ताह जेल भेज दी गई। टीवी पत्रकारों के कारण। ये तथाकथित पत्रकार मिल कर तय न करते कि इस ‘विषकन्या’ की वजह से सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई थी, तो न केंद्र सरकार की तीन सबसे बड़ी जांच संस्थाएं इसके पीछे पड़तीं, न राजनेता इस मामले में कूदे होते बिहार में आने वाले चुनावों को ध्यान में रख कर। कुछ टीवी चैनल और जाने-माने एंकरों ने शुरू से रिया की गिरफ्तारी की मांग ऐसे की जैसे कि उनका निजी मामला हो।

इस अठाईस वर्ष की महिला का जिस तरह शिकार किया है इन ‘पत्रकारों’ ने, शायद ही भारतीय पत्रकारिता में पहले किसी का किया गया हो। जो इन लोगों ने किया है उसको पत्रकारिता कहना ही गलत होगा। एक वरिष्ठ पत्रकार होने के नाते मुझे पहली बार अपने व्यवसाय पर शर्मिंदगी महसूस हुई है।

मुझे हमेशा पत्रकार होने पर गर्व रहा है। शायद इसलिए कि पहली नौकरी भारतीय पत्रकारिता में मिली थी मुझे, दिल्ली के स्टेट्समैन अखबार में इमरजेंसी लगने से एक महीने पहले। यह वह समय था, जब मीडिया के नाम पर कुछ मुट्ठी भर अंग्रेजी और हिंदी के अखबार थे और कुछ मुट्ठी भर पत्रिकाएं। टीवी पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ दूरदर्शन था। सो, इंदिरा गांधी के लिए आसान था प्रेस की बोलती बिल्कुल बंद करना। स्टेट्समैन अखबार ने साहस दिखा कर सेंसरशिप का विरोध किया पहले दिन से अखबार में खाली जगह रख कर, जहां विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के बारे में लिखा जाना था।

उस समय मैं एक मामूली रिपोर्टर थी, लेकिन इतना उत्साह था हम लोगों में कि सेंसरशिप का विरोध करना हमने अपना कर्तव्य माना। उन दिनों राष्ट्रीय स्तर की पत्रकारिता में शायद दस से ज्यादा महिलाएं नहीं थीं, लेकिन हमने मिल कर दहेज के खिलाफ मुहिम छेड़ी। जब भी कोई नव-विवाहित महिला की मृत्यु की खबर मिलती, हम उसके घर पहुंच जाया करती थीं उसकी मौत की पूरी कहानी खोजने। बलात्कार के मामले भी हमने उठाने शुरू किए और तभी जाकर कानून बदले गए।

उस दौर की मुझे बहुत याद आई पिछले दिनों, जब मैंने देखा कि रिया को ‘विषकन्या’ और चुड़ैल साबित करने में सबसे ज्यादा योगदान महिला पत्रकारों का रहा। रिया को जलील करने के प्रयास में इन्होंने पत्रकारिता को जलील किया है। चीख-चीख कर प्रसिद्ध एंकरों ने रिया की गिरफ्तारी की मांग की शुरू से। पहले आरोप लगाया इन्होंने कि इस नाकाम अभिनेत्री ने सुशांत के पैसे चुराए हैं और उसकी या तो हत्या कर दी है या उसे आत्महत्या करने पर मजबूर किया है। सीबीआइ की जांच मांगी गई और इस मांग का समर्थन कंगना रनौत और सुशांत की बहनों ने भी किया।

जब सीबीआाइ की जांच होने के बाद आरोप बेबुनियाद साबित हुए और प्रवर्तन निदेशालय ने पंद्रह करोड़ रुपए चुराने का आरोप निराधार बताया, तब आरोप लगा ‘ड्रग्स’ का। अभी तक साबित सिर्फ यह हुआ है कि सुशांत के लिए रिया चरस लाया करती थी और शायद उसके साथ पीती भी थी। अगर यह आरोप इतना गंभीर है कि उसको जेल में रखना जरूरी है, तो भारत की आधी आबादी को जेल भेजना पड़ेगा। खासकर होली के अगले दिन, जब भंग का खुल कर सेवन होता है।

अब रिया और उसके भाई को जमानता मिल भी जाएगी तो उसका क्या फायदा। इस मध्यवर्गीय परिवार को इतना बदनाम कर दिया गया है कि आगे का जीवन उनका मुश्किल से बीतेगा। ऐसा हुआ है सिर्फ इसलिए कि मेरे कुछ मीडिया बंधुओं और बहनों ने पत्रकारिता के नाम पर लिंचिंग की है। जिस तरह ये तथाकथित पत्रकार गिद्धों की तरह रोज सुबह मंडराते थे रिया के घर के बाहर, वह देख कर मुझे इतनी शर्म आई कि मैंने टीवी पर समाचार देखना ही बंद कर दिया है। मंडराते रहे ये ‘पत्रकार’ इस महिला के घर के आसपास, जब तक उसको गिरफ्तार नहीं किया गया।

मेरा मानना है कि न उसकी, न उसके भाई को गिरफ्तार करने की नौबत आती, अगर टीवी पत्रकारों का इतना दबाव न पड़ता। नाम नहीं लेना चाहती हूं, लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि एक दो प्रसिद्ध महिला पत्रकारों ने जिस तरह रोज कहना शुरू किया था कि ‘क्या आज गिरफ्तार होंगी रिया’, वह शर्मनाक था।

रही बात ड्रग्स की, तो न हम पत्रकारों में हिम्मत है असली ड्रग्स सरदारों को पकड़ने की और न ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारियों की। हम सब जानते हैं कि जो लोग इस धंधे के सरगना हैं, वे इतने ताकतवर और खतरनाक लोग हैं कि जो भी उनकी राह रोकने की कोशिश करता है, उसकी और उसके परिवार वालों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है। यह ऐसा व्यवसाय है जिसकी जड़ें पूरी दुनिया में फैली हुई हैं। हाल में जो ‘आर्या’ टीवी सीरियल बना है, उसमें इसकी थोड़ी-सी झलक देखने को मिलती है, लेकिन सिर्फ थोड़ी-सी।

सो, क्या हासिल हुआ है रिया को जेल भेज कर? क्या अब बॉलीवुड के सितारे कोकेन लेना बंद कर देंगे? क्या अब ड्रग्स के बड़े सरदार पकड़े जाएंगे? क्या पाकिस्तान से हेरोइन आना बंद हो जाएगा? क्या कोकेन का कारोबार दक्षिण अमेरिका के देशों में बंद हो जाएगा?

ऐसा कुछ नहीं होने वाला है, लेकिन ऐसा जरूर हो गया है कि एक वरिष्ठ फौजी अफसर का परिवार बर्बाद हो गया है। इसलिए नहीं कि रिया ने चरस खरीद कर सुशांत को लाकर दी थी, सिर्फ इसलिए कि भारतीय टीवी के कुछ चैनलों ने ठान लिया था इस महिला को बर्बाद करने का। सच पूछिए तो भारतीय पत्रकारिता में चालीस वर्ष से ज्यादा गुजारने के बाद पहली बार शर्मिंदा हूं कि मैं एक पत्रकार हूं।

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