माँ ने चूड़ी बेचकर के बेटी को पढाई और बेटी “Wasima Shaikh” बन गईं डिप्टी कलेक्टर

wasima shaikh

महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन का रिजल्ट आया इसमें Wasima Shaikh ने महिलाओं कैटेगरी में तीसरी पोजिशन हासिल की हैं । मगर येह सफर इतना आसान नहीं था।

कौन हैं वसीमा शैख़?

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वसीमा का जन्म नांदेड़ मैं हुआ था उनके पिता मानसिख बीमार हैं और उनकी अम्मी घर घर घूमके की चूड़ियां बेचती थी। उनके भाई पुणे मैं ऑटो रिक्शा चलते हैं। दूसरे भाई बैचलर ऑफ साइंस की पढ़ाई की, मगर घर की हालत ठीक नहीं थी, तो पढाई छोड़ कर कमाने लगे। उनकी अम्मी ने वसीमा का सपनो को समर्थन किआ।

इसे पहले वो 2018 का MPSC का एग्जाम दिए और उसमे मैं उन्हें इंस्पेक्टर का पद मिला था। मगर उनका सपना कुछ बड़ा था इसलिए वो अपना पढाई बरकर्रार रखी। इसका इनाम उन्हें 2020 मैं मिला।

अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपने भाई और अम्मी को देती हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाई मुझे नहीं पढ़ाते तो मैं आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाती। मेरी अम्मी ने बहुत मेहनत की। वसीमा नांदेड़ से लगभग 5 किलोमीटर दूर पैदल पढ़ने जाती थी।

गरीबों के लिए येह काम करेंगे वसीमा?

वह कहती हैं की , ‘मैंने अपने आसपास, परिवार में और अपने इलाके में गरीबी और तकलीफ को बहुत पास से देखि हूं। एक तरफ सरकार और उसके साधन थे, दूसरी तरफ गरीब जनता। बीच में एक मीडिएटर की जरूरत थी, मैं वही मीडिएटर बनना चाहती हूं और लोगों का सेबा करना चाहती हूं ।’

वसीमा शेख कहती हैं की ” मेरी मां अब दूसरे लोगों के खेतों में काम नहीं करेगी और कठोर धूप में नहीं सोएगी, क्योंकि मैं अभी डिप्टी कलेक्टर बन गई हूं।

बहुत कठिन समय था जब उनके रिश्तेदार उनकी शादी के लिए लगातार उनकी माँ पर दबाव डालते थे। रिश्तेदार हर वक़्त येह कहा कर तेथे की अगर मुझे सरकारी नौकरी मिल जाती है, तो भी मेरे होने वाले भविष्य के ससुराल इसे पसंद नहीं करेंगे। रिश्तेदार हर वक़्त कहा करते थे की मेरा परिवार पैसा बर्बाद कर रहा है। लेकिन शुक्र है कि मेरी अम्मी ने उन्हें चुप करा दिया और मुझे दूसरी बार परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित दिया।

एक गरीब लड़की सँघर्ष करती हुई डिप्टी कलेक्टर बन गयी यह कहानी हम्हे येह बताता हे की आप जब कोई भी चीज़ को पाने के लिए कोशिश करते हैं वो चीज़ आप को एक दिन जरूर मिलता हे । इसलिए हरवक्त कोशिश करना चाइये।

आप को ये किसा केसा लगा जरूर कमेंट करके हम्हे बतायें

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